क्या OnePlus भारत से अपना कारोबार समेट रहा है? हकीकत जानिए!

क्या OnePlus भारत से अपना कारोबार समेट रहा है? हकीकत जानिए!

OnePlus की बिक्री क्यों कम हो रही है?

OnePlus को एक समय “फ्लैगशिप किलर” के रूप में जाना जाता था। अपने किफायती दाम और बेहतरीन फीचर्स की बदौलत कंपनी ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री में धूम मचा दी थी। लेकिन हाल के वर्षों में, कंपनी की बिक्री में भारी गिरावट आई है। आइए जानें कि आखिर One Plus की बिक्री में कमी क्यों आ रही है:

  1. बढ़ती कीमतें

One Plus ने शुरुआत में एक किफायती प्रीमियम ब्रांड के रूप में अपनी पहचान बनाई थी, जहां उपभोक्ताओं को हाई-एंड स्पेसिफिकेशन्स कम कीमत में मिलते थे। जब 2014 में OnePlus One लॉन्च हुआ था, तो इसकी कीमत अन्य प्रमुख फ्लैगशिप फोन्स के मुकाबले लगभग आधी थी, जिससे यह एक “फ्लैगशिप किलर” के रूप में मशहूर हुआ। हालांकि, समय के साथ One Plus ने अपनी प्राइसिंग रणनीति बदल दी।

नए मॉडल्स, जैसे OnePlus 11 और OnePlus 12, अब सीधे ऐप्पल और सैमसंग के फ्लैगशिप डिवाइसेज़ की कीमतों से मुकाबला कर रहे हैं। One Plus ने अपने डिवाइसेज़ में प्रीमियम हार्डवेयर और फीचर्स जोड़कर उनकी कीमतें बढ़ा दी हैं, जिससे इसकी मूल पहचान बदलती जा रही है। पहले जो ब्रांड बजट-फ्रेंडली फ्लैगशिप विकल्प के रूप में जाना जाता था, अब वही हाई-एंड स्मार्टफोन मार्केट में प्रतिस्पर्धा कर रहा है। इस बदलाव से कुछ पुराने प्रशंसक निराश हो सकते हैं, लेकिन कंपनी का फोकस अब प्रीमियम सेगमेंट पर अधिक है।

  1. प्रोडक्ट लाइन में बदलाव

One Plus ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब केवल हाई-एंड फ्लैगशिप फोन्स तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि मिड-रेंज और बजट सेगमेंट में भी अपने डिवाइसेज़ लॉन्च कर रहा है। पहले One Plus को एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में जाना जाता था, जो कम कीमत में हाई-एंड स्पेसिफिकेशन्स प्रदान करता था। लेकिन अब OnePlus Nord, Nord CE और Nord N सीरीज जैसे किफायती स्मार्टफोन्स लॉन्च करके कंपनी ने अपने प्रोडक्ट लाइनअप का विस्तार किया है। इस बदलाव से कंपनी को एक व्यापक उपभोक्ता आधार तक पहुंचने में मदद मिली, लेकिन साथ ही इसकी प्रीमियम ब्रांडिंग भी कमजोर पड़ गई।

पहले जहां One Plus एक एक्सक्लूसिव और एलिट ब्रांड माना जाता था, अब वह बजट-फ्रेंडली विकल्पों की वजह से अधिक मास-मार्केट ब्रांड बन गया है। इस रणनीति ने बिक्री बढ़ाने में मदद की है, लेकिन One Plus की विशिष्ट पहचान अब उतनी प्रभावशाली नहीं रही जितनी पहले थी।

  1. सॉफ़्टवेयर और अपडेट्स की समस्या

One Plus की शुरुआत में इसका OxygenOS यूजर्स के बीच काफी लोकप्रिय था क्योंकि यह लगभग स्टॉक एंड्रॉयड जैसा क्लीन, फास्ट और एड-फ्री अनुभव प्रदान करता था। यह One Plus के फोन्स को दूसरे ब्रांड्स से अलग बनाता था और टेक-एनथूज़िएस्ट्स इसे बहुत पसंद करते थे। लेकिन OPPO के साथ मर्जर के बाद One Plus ने अपने सॉफ़्टवेयर को OPPO के ColorOS के साथ मिला दिया, जिससे OxygenOS का ओरिजिनल रूप काफी बदल गया। अब इसमें ज्यादा कस्टमाइजेशन और OPPO के UI एलिमेंट्स शामिल हो गए हैं, जिससे यूजर एक्सपीरियंस पहले जैसा स्मूथ और फास्ट नहीं रहा।

कई यूजर्स ने शिकायत की है कि नए अपडेट्स पहले की तुलना में धीमे आते हैं और सॉफ़्टवेयर पहले जितना हल्का और रेस्पॉन्सिव नहीं लगता। One Plus का यह बदलाव उन यूजर्स को निराश कर सकता है, जिन्होंने इसे खास तौर पर OxygenOS के लिए चुना था, क्योंकि अब यह एक अलग पहचान खोता जा रहा है।

  1. प्रतियोगिता में बढ़त

One Plus को अब स्मार्टफोन मार्केट में पहले से कहीं ज्यादा कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। Xiaomi, Realme, iQOO और Samsung जैसी कंपनियां अब OnePlus के समान हाई-एंड स्पेसिफिकेशन्स वाले स्मार्टफोन, लेकिन कम कीमत में पेश कर रही हैं। खासकर iQOO और Realme जैसी ब्रांड्स ने पावरफुल प्रोसेसर, हाई-रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और फास्ट चार्जिंग जैसी फ्लैगशिप स्पेसिफिकेशन्स को मिड-रेंज सेगमेंट में भी उपलब्ध करा दिया है।

इससे One Plus की सबसे बड़ी यूएसपी—”फ्लैगशिप स्पेक्स इन अफोर्डेबल प्राइस”—अब उतनी प्रभावी नहीं रही। वहीं, Xiaomi और Samsung भी अपने प्रीमियम और मिड-रेंज डिवाइसेज़ में बेहतर कैमरा, बैटरी और सॉफ़्टवेयर सपोर्ट के साथ One Plus को टक्कर दे रहे हैं। इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण One Plus को अब सिर्फ हार्डवेयर स्पेसिफिकेशन्स पर ही नहीं, बल्कि सॉफ़्टवेयर, सर्विस और ब्रांड वैल्यू पर भी अधिक ध्यान देना होगा ताकि वह मार्केट में अपनी पकड़ बनाए रख सके।

  1. ओप्पो के साथ मर्जर का असर

One Plus और ओप्पो का मर्जर स्मार्टफोन इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव था, जिसने One Plus की स्वतंत्र पहचान को काफी प्रभावित किया। पहले One Plus को एक अलग और इनोवेटिव ब्रांड के रूप में देखा जाता था, जो कस्टमर-फीडबैक पर आधारित बदलाव लाकर एक अनोखा यूजर एक्सपीरियंस प्रदान करता था। लेकिन OPPO के साथ आधिकारिक मर्जर के बाद, अब One Plus को ओप्पो के सब-ब्रांड के रूप में देखा जाने लगा है।

इस मर्जर का सबसे बड़ा असर One Plus के बिजनेस मॉडल और सॉफ़्टवेयर पर पड़ा है। हार्डवेयर डिज़ाइन, सप्लाई चेन और रिसर्च & डेवलपमेंट में ओप्पो का इन्फ्लुएंस साफ नजर आने लगा है। साथ ही, One Plus का OxygenOS अब OPPO के ColorOS से काफी मिलता-जुलता हो गया है, जिससे इसका यूनीक सॉफ़्टवेयर एक्सपीरियंस कमजोर हुआ है। यह बदलाव पुराने One Plus यूजर्स के लिए थोड़ा निराशाजनक हो सकता है, क्योंकि अब One Plus की वह स्वतंत्र और एक्सक्लूसिव पहचान पहले जैसी नहीं रही।

क्या भारत में One Plus शोरूम बंद हो रहा है?

भारत में One Plus के एक्सक्लूसिव स्टोर्स धीरे-धीरे कम हो रहे हैं, क्योंकि कंपनी अब ऑनलाइन बिक्री पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। हालांकि, प्रमुख शहरों में अभी भी कुछ One Plus एक्सपीरियंस स्टोर्स मौजूद हैं, लेकिन उनकी संख्या पहले की तुलना में घटती जा रही है। One Plus ने अपनी मार्केटिंग और बिक्री रणनीति को बदलते हुए अब अमेज़ॅन, फ्लिपकार्ट और अपने आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर के जरिए प्रोडक्ट्स को प्रमोट करना शुरू कर दिया है।

इस बदलाव के पीछे एक बड़ा कारण लागत बचत है। स्टोर्स को बनाए रखना, किराया देना और स्टाफ की सैलरी जैसी चीजों में कंपनी का काफी खर्च होता है। ऑनलाइन बिक्री के जरिए यह खर्च कम किया जा सकता है और सीधे ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाना आसान हो जाता है। इसके अलावा, One Plus की ऑनलाइन बिक्री रणनीति से ग्राहकों को भी समय-समय पर विशेष ऑफर्स और डिस्काउंट मिलने लगे हैं, जो ऑफलाइन स्टोर्स में उपलब्ध नहीं होते थे।

हालांकि, इस बदलाव के कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। जो ग्राहक फोन खरीदने से पहले उसे हाथ में पकड़कर देखना और इस्तेमाल करके अनुभव करना पसंद करते हैं, उनके लिए ऑफलाइन स्टोर्स की कमी एक समस्या बन सकती है। One Plus के फ्लैगशिप मॉडल्स की कीमतें अब प्रीमियम रेंज में आने लगी हैं, और ऐसे में ग्राहक बिना डिवाइस को टेस्ट किए इतनी बड़ी रकम खर्च करने में झिझक सकते हैं।

कुल मिलाकर, One Plus का फोकस अब ऑनलाइन सेल्स को बढ़ावा देने पर है, जिससे कंपनी को लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशन कॉस्ट बचाने में मदद मिल रही है। लेकिन ऑफलाइन स्टोर्स की कमी के कारण ग्राहक अनुभव पर असर पड़ सकता है, जिससे कंपनी को भविष्य में अपनी रणनीति को और संतुलित करने की जरूरत पड़ सकती है।

One Plus डाउन क्यों हुआ?

  1. पहले की तरह इनोवेशन की कमी

One Plus को शुरुआत में एक इनोवेटिव ब्रांड के रूप में पहचाना जाता था, जो हर नए मॉडल के साथ कुछ नया लाने की कोशिश करता था। OnePlus One में दमदार स्पेसिफिकेशन्स के साथ बेहद किफायती कीमत, OnePlus 3 में डैश चार्जिंग, OnePlus 5T में फुल-स्क्रीन डिस्प्ले, और OnePlus 7 Pro में 90Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले जैसे फीचर्स इसे बाकी कंपनियों से अलग बनाते थे। लेकिन हाल के वर्षों में One Plus की इनोवेशन स्पीड धीमी पड़ गई है।

अब One Plus के नए स्मार्टफोन्स में ऐसे फीचर्स की कमी दिखती है जो मार्केट में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हों। OnePlus 11 और OnePlus 12 जैसे लेटेस्ट मॉडल्स में अच्छे स्पेसिफिकेशन्स जरूर हैं, लेकिन वे iQOO, Realme और Samsung जैसे ब्रांड्स के फोन्स से बहुत अलग महसूस नहीं होते। पहले जहां One Plus नए और अनोखे फीचर्स पेश कर बाकी कंपनियों को ट्रेंड फॉलो करने पर मजबूर करता था, अब वही कंपनी बाकी ब्रांड्स के ट्रेंड्स को अपनाने लगी है।

इसका एक कारण OPPO के साथ मर्जर भी हो सकता है, क्योंकि अब One Plus स्वतंत्र रूप से रिसर्च और डिवेलपमेंट पर काम करने के बजाय OPPO की टेक्नोलॉजी और डिज़ाइन स्ट्रैटेजी को फॉलो कर रहा है। इस बदलाव से One Plus की खास पहचान कमजोर पड़ गई है, जिससे ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की उत्सुकता पहले जैसी नहीं रही।

  1. उपभोक्ताओं की बदलती पसंद

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। पहले जहां लोग प्रीमियम फ्लैगशिप फोन्स खरीदने की इच्छा रखते थे, अब वे मिड-रेंज और प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट के फोन्स को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि Xiaomi, iQOO, और Realme जैसी कंपनियां कम कीमत में हाई-एंड स्पेसिफिकेशन्स वाले फोन उपलब्ध करा रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को फ्लैगशिप जैसी परफॉर्मेंस और फीचर्स किफायती दामों में मिल रहे हैं, जिससे One Plus जैसी कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ रहा है।

पहले One Plus अपने “फ्लैगशिप किलर” टैग के कारण बेहद लोकप्रिय था, क्योंकि यह कम कीमत में प्रीमियम स्पेसिफिकेशन्स देता था। लेकिन अब One Plus के स्मार्टफोन्स की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे यह अपने मूल ग्राहक वर्ग से थोड़ा दूर होता जा रहा है। दूसरी ओर, iQOO और Realme जैसे ब्रांड्स Snapdragon 8 सीरीज प्रोसेसर, 120Hz डिस्प्ले, और फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स को 30,000-40,000 रुपये की रेंज में पेश कर रहे हैं, जो पहले केवल फ्लैगशिप फोन्स में मिलते थे।

इस बदलते ट्रेंड को देखते हुए One Plus को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा। अगर कंपनी मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाई, तो वह अपने पुराने यूजर्स को धीरे-धीरे खो सकती है।

  1. अधिक कीमत पर कम फीचर्स

One Plus को शुरू में अपनी “फ्लैगशिप किलर” रणनीति के लिए जाना जाता था, जहां यह कम कीमत में हाई-एंड फीचर्स देता था। OnePlus One जब लॉन्च हुआ था, तो उसने बाजार में धूम मचा दी थी क्योंकि वह बड़े ब्रांड्स के फ्लैगशिप फोन्स की आधी कीमत में लगभग समान स्पेसिफिकेशन्स ऑफर करता था। लेकिन समय के साथ One Plus की प्राइसिंग रणनीति पूरी तरह बदल गई। अब इसके फ्लैगशिप फोन्स, जैसे OnePlus 11 और OnePlus 12, सीधे ऐप्पल और सैमसंग के प्रीमियम स्मार्टफोन्स के मुकाबले खड़े हो गए हैं।

समस्या सिर्फ कीमत बढ़ने की नहीं है, बल्कि यह भी है कि अब One Plus के डिवाइसेज़ में पहले जैसा बड़ा इनोवेशन नहीं दिखता। नई तकनीकों के मामले में यह अन्य ब्रांड्स के मुकाबले धीमा पड़ता जा रहा है। वहीं, iQOO, Xiaomi और Realme जैसे ब्रांड्स समान या बेहतर स्पेसिफिकेशन्स कम कीमत में उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे One Plus की “वैल्यू फॉर मनी” पहचान कमजोर हो गई है।

इसके अलावा, OnePlus के कुछ नए फोन्स में IP रेटिंग, वायरलेस चार्जिंग और टेलीफोटो लेंस जैसे फीचर्स नहीं मिलते, जबकि इसी प्राइस रेंज में अन्य कंपनियां ये सुविधाएं दे रही हैं। इस वजह से कई यूजर्स को लगता है कि One Plus अब पहले जितना किफायती और इनोवेटिव ब्रांड नहीं रहा।

  1. ब्रांड लॉयल्टी में गिरावट

One Plus की शुरुआत एक ऐसे ब्रांड के रूप में हुई थी, जिसे ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। इसका कस्टमर-बेस बहुत वफादार था क्योंकि कंपनी “फ्लैगशिप किलर” के रूप में प्रीमियम फीचर्स किफायती कीमत पर देती थी। लेकिन हाल के वर्षों में One Plus ने अपनी मूल रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे उसके पुराने यूजर्स निराश हो रहे हैं।

पहले One Plus अपने कस्टमर्स की फीडबैक को प्राथमिकता देता था और हर नए फोन में कुछ नया लाने की कोशिश करता था। लेकिन OPPO के साथ मर्जर के बाद, One Plus का बिजनेस मॉडल बदल गया है। अब इसके फोन में पहले जैसी एक्सक्लूसिविटी नहीं दिखती, और सॉफ़्टवेयर एक्सपीरियंस भी ColorOS जैसा हो गया है। इसके अलावा, One Plus की कीमतें बढ़ने के बावजूद फीचर्स में बहुत बड़ा सुधार नहीं हुआ है, जिससे ग्राहक अब सैमसंग, iQOO और Google जैसे ब्रांड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

One Plus की ब्रांड लॉयल्टी में गिरावट का एक और कारण प्रतियोगिता का बढ़ना है। अब iQOO और Realme जैसे ब्रांड्स One Plus जैसी स्पेसिफिकेशन्स कम कीमत पर दे रहे हैं, जिससे यूजर्स के पास बेहतर विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। यदि One Plus अपनी रणनीति में बदलाव नहीं करता, तो वह धीरे-धीरे अपने पुराने ग्राहकों को खो सकता है।

क्या One Plus कंपनी भारत छोड़ रही है?

One Plus भारत में अब भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है और नए स्मार्टफोन और अन्य प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रहा है, लेकिन इसकी स्थिति पहले जितनी मजबूत नहीं रही। कंपनी ने हाल ही में OnePlus 12, OnePlus 12R और OnePlus Nord सीरीज के नए मॉडल भारत में पेश किए हैं, जो यह साबित करता है कि One Plus फिलहाल भारतीय बाजार छोड़ने का कोई इरादा नहीं रखता। हालांकि, कंपनी की रणनीति और प्राथमिकताएं अब पहले से अलग हो गई हैं।

One Plus की भारत में घटती पकड़

एक समय था जब One Plus भारतीय प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में सबसे लोकप्रिय ब्रांडों में से एक था। इसकी “फ्लैगशिप किलर” रणनीति, जिसमें हाई-एंड फीचर्स किफायती दाम में मिलते थे, भारतीय ग्राहकों के बीच बेहद सफल रही थी। लेकिन हाल के वर्षों में One Plus की कीमतें बढ़ गई हैं और इनोवेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इसका सीधा असर ब्रांड की लोकप्रियता पर पड़ा है।

इसके अलावा, Xiaomi, iQOO, Realme और Samsung जैसी कंपनियां अब One Plus को कड़ी टक्कर दे रही हैं। ये ब्रांड्स OnePlus जैसे स्पेसिफिकेशन्स के साथ किफायती कीमत पर स्मार्टफोन लॉन्च कर रहे हैं, जिससे भारतीय ग्राहक अन्य ब्रांड्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। One Plus की बढ़ती कीमतों और प्रतिस्पर्धा के कारण इसका मार्केट शेयर पहले जैसा मजबूत नहीं रहा।

ग्लोबल मार्केट पर बढ़ता फोकस

One Plus अब भारत से ज्यादा ग्लोबल मार्केट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कंपनी अमेरिका और यूरोप में अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को ज्यादा प्रमोट कर रही है, जहां ग्राहक महंगे स्मार्टफोन खरीदने के लिए तैयार रहते हैं। इसी कारण से, One Plus ने हाल ही में अपने स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ाई हैं और अब इसे सैमसंग और ऐप्पल के प्रीमियम मॉडल्स के मुकाबले रखा जा रहा है।

इसके अलावा, One Plus अब केवल स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इकोसिस्टम प्रोडक्ट्स जैसे स्मार्टवॉच, टैबलेट और ऑडियो डिवाइसेज़ पर भी ध्यान दे रहा है। One Plus ने OnePlus Pad और OnePlus Buds जैसी डिवाइसेज़ लॉन्च की हैं, जिससे यह साफ होता है कि कंपनी अब केवल भारतीय स्मार्टफोन बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहती।

क्या One Plus को भारत में वापसी के लिए रणनीति बदलनी होगी?

अगर One Plus भारतीय बाजार में अपनी पुरानी पकड़ वापस पाना चाहता है, तो उसे अपनी मूल रणनीति की ओर लौटना होगा। पहले की तरह वैल्यू फॉर मनी स्मार्टफोन लॉन्च करना, इनोवेटिव फीचर्स लाना और कस्टमर-फ्रेंडली सॉफ़्टवेयर अनुभव देना One Plus के लिए जरूरी हो गया है।

One Plus को यह भी समझना होगा कि भारतीय उपभोक्ता अब प्रीमियम फ्लैगशिप से ज्यादा मिड-रेंज और प्रीमियम मिड-रेंज डिवाइसेज़ को प्राथमिकता दे रहे हैं। iQOO और Realme जैसे ब्रांड्स 30,000-40,000 रुपये की रेंज में हाई-एंड स्पेसिफिकेशन्स दे रहे हैं, जो One Plus के लिए चुनौती बन गया है।

One Plus फिलहाल भारत छोड़ने की योजना नहीं बना रहा, लेकिन कंपनी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही। इसका फोकस अब वैश्विक बाजारों की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारतीय ग्राहकों को One Plus के स्मार्टफोन्स पहले जितने आकर्षक नहीं लग रहे। अगर One Plus को भारतीय बाजार में फिर से अपनी जगह बनानी है, तो उसे अपने पुराने “फ्लैगशिप किलर” अवतार में वापसी करनी होगी और प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए कीमतों और फीचर्स का सही संतुलन बनाना होगा।

निष्कर्ष

OnePlus ने एक समय अपने अनोखे बिजनेस मॉडल और फ्लैगशिप किलर ब्रांडिंग से स्मार्टफोन इंडस्ट्री में क्रांति लाई थी। लेकिन मौजूदा हालात में, कंपनी को नई रणनीति अपनाने की जरूरत है। बढ़ती कीमतें, प्रतियोगिता और ओप्पो के साथ मर्जर ने ब्रांड की पुरानी पहचान को कमजोर किया है।

अगर One Plus को अपने खोए हुए यूजर्स वापस चाहिए, तो उन्हें कस्टमर सेंट्रिक अप्रोच और बेहतर इनोवेशन पर ध्यान देना होगा। उन्हें अपनी कीमतों को फिर से प्रतिस्पर्धात्मक बनाना होगा और सॉफ़्टवेयर अपग्रेड्स को बेहतर बनाना होगा।

OnePlus के लिए अभी भी उम्मीद बाकी है, लेकिन यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी आने वाले वर्षों में किस तरह की रणनीति अपनाती है।

 

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