हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर: क्या ये एक ही हैं? जानें इनके बीच का अंतर और इनसे कैसे बचें (Heart Attack vs Heart Failure: Differences and Prevention)

हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर: अंतर जानें और इन्हें कैसे रोका जा सकता है

Contents hide
2 Heart Attack vs Heart Failure: Differences and Prevention

Heart Attack vs Heart Failure: Differences and Prevention

हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर- दिल की बीमारी दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है, और इसमें कई प्रकार की स्थितियाँ शामिल हैं, जिनमें हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर भी आते हैं। यह आम गलतफहमी है कि हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर एक ही बीमारी हैं, जबकि ये दोनों अलग-अलग हृदय संबंधी स्थितियाँ हैं। इन दोनों के बीच के अंतर को समझना और इनसे बचने के तरीके जानना दिल के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

इस लेख में, हम हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर के बीच अंतर, इनसे बचने के उपाय, दिल के मरीजों के लिए सेक्स करना कितना सुरक्षित है, और पुरुष-और महिला में हार्ट अटैक के लक्षणों में क्या अंतर होते हैं, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके अंत तक, आपको इन महत्वपूर्ण हृदय संबंधी मुद्दों के बारे में स्पष्ट समझ हो जाएगी।

हार्ट अटैक क्या है?

हार्ट अटैक, जिसे चिकित्सा भाषा में मायोकार्डियल इन्फार्क्शन कहा जाता है, तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह अवरोध आमतौर पर कोरोनरी आर्टरी में खून के थक्के से होता है, जो दिल को रक्त आपूर्ति करने वाली आर्टरी होती है। जब रक्त का प्रवाह पर्याप्त नहीं होता, तो प्रभावित हृदय मांसपेशी मरने लगती है क्योंकि उसे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप सीने में दर्द, सांस की तकलीफ और अन्य लक्षण हो सकते हैं।

हार्ट अटैक के कारण मुख्यतः कोरोनरी आर्टरी में पट्टिकाओं का जमाव (एथेरोस्क्लेरोसिस) होते हैं। समय के साथ ये पट्टिकाएँ फट सकती हैं और खून का थक्का बन सकता है, जो रक्त प्रवाह को रोकता है।

हार्ट अटैक के लक्षण:

हार्ट अटैक, जिसे मेडिकल भाषा में मायोकार्डियल इन्फार्क्शन कहा जाता है, तब होता है जब दिल के किसी हिस्से तक रक्त प्रवाह रुक जाता है। इस स्थिति में, दिल की मांसपेशी को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती, जिससे मांसपेशी का एक हिस्सा मरने लगता है। हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर अचानक आते हैं, और यह व्यक्ति की जान को खतरे में डाल सकते हैं, इसलिए इसे तुरंत पहचानना और उपचार करवाना बहुत महत्वपूर्ण है।

यहां हम हार्ट अटैक के प्रमुख लक्षणों पर चर्चा करेंगे:

  1. सीने में दर्द या दबाव

हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण सीने में दर्द या दबाव महसूस होना है। यह दर्द अक्सर सीने के बीच में या बाईं ओर होता है। यह दर्द तीव्र हो सकता है, जैसे कोई भारी वस्तु सीने पर रख दी हो या जैसे किसी ने सीने को दबा दिया हो। कभी-कभी यह दर्द हल्का भी हो सकता है, जिसे हल्की ऐंठन या दबाव के रूप में महसूस किया जा सकता है। इस दर्द का समय भी भिन्न हो सकता है, कभी यह कुछ मिनटों तक रहता है, और कभी यह लंबे समय तक बना रहता है।

  1. हाथों, पीठ, गर्दन, या जबड़े में दर्द

सीने में दर्द के साथ-साथ, हार्ट अटैक के दौरान शरीर के अन्य हिस्सों में भी दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द अक्सर बाएं हाथ, बाएं कंधे, पीठ, गर्दन, या जबड़े में महसूस होता है। यह दर्द कभी-कभी हल्का और कभी अधिक तीव्र हो सकता है। यह लक्षण विशेष रूप से पुरुषों और महिलाओं में आम होते हैं और हार्ट अटैक की पहचान में मदद कर सकते हैं।

  1. सांस की तकलीफ

हार्ट अटैक के दौरान व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। यह तकलीफ सीने के दर्द के साथ या उसके बिना भी हो सकती है। कुछ लोग महसूस करते हैं कि उनका सांस रुक रहा है, या उन्हें सामान्य रूप से सांस लेने में कठिनाई हो रही है। यह लक्षण बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह संकेत देता है कि दिल का रक्त संचार प्रभावित हो गया है, और शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो रही है।

  1. ठंडे पसीने आना और चक्कर आना

हार्ट अटैक के दौरान शरीर में तनाव बढ़ जाता है, जिससे ठंडे पसीने आ सकते हैं। साथ ही, व्यक्ति को चक्कर आना या हल्का महसूस हो सकता है। यह लक्षण अचानक महसूस हो सकता है, और यह किसी को भी बेहोश भी कर सकता है। यह लक्षण खासकर महिलाओं में अधिक देखा जाता है।

  1. उल्टी या मिचली

कुछ लोगों को हार्ट अटैक के दौरान मिचली या उल्टी का अनुभव भी हो सकता है। यह लक्षण अक्सर महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। हार्ट अटैक के साथ पेट में असहजता, अपच, या उल्टी भी महसूस हो सकती है। यह लक्षण कई बार अन्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं, जैसे अपच या गैस्ट्रिक समस्याएँ, लेकिन अगर यह लक्षण अचानक आए और अन्य हार्ट अटैक के लक्षणों के साथ जुड़े हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

  1. थकान और कमजोरी

हार्ट अटैक के दौरान व्यक्ति को अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है, यहां तक कि बिना शारीरिक गतिविधि के भी। यह थकान सामान्य थकावट से कहीं अधिक होती है और कभी-कभी इसे हल्के सिरदर्द या चक्कर से भी जोड़ा जा सकता है। यह लक्षण महिलाओं में अधिक आम है और उन्हें हार्ट अटैक की पहचान में मदद कर सकता है।

  1. असामान्य घबराहट या घबराहट का अहसास

कुछ लोग हार्ट अटैक के दौरान अचानक घबराहट या अनिश्चितता का अनुभव करते हैं। उन्हें लगता है जैसे कुछ गलत हो रहा है, या वे कुछ गंभीर महसूस कर रहे हैं। यह मानसिक तनाव और शारीरिक लक्षणों का संयोजन हो सकता है, जो हार्ट अटैक का हिस्सा हो सकता है।

हार्ट फ़ेलियर क्या है?

हार्ट फ़ेलियर, जिसे कंजेस्टिव हार्ट फ़ेलियर (CHF) भी कहा जाता है, तब होता है जब दिल पर्याप्त रूप से रक्त पंप नहीं कर पाता है ताकि शरीर की ज़रूरतें पूरी हो सकें। यह हार्ट अटैक के विपरीत एक ऐसी स्थिति है जो समय के साथ विकसित होती है, जिसमें दिल की मांसपेशियों की ताकत घटने लगती है। यह उच्च रक्तचाप, कोरोनरी आर्टरी रोग, हृदय वाल्व रोग या पूर्व में हुए हार्ट अटैक के कारण हो सकता है।

हार्ट फ़ेलियर में, दिल की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है, जिससे रक्त फेफड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों में जमा होने लगता है, जिससे सूजन और सांस की तकलीफ जैसी समस्याएं होती हैं।

हार्ट फ़ेलियर के लक्षण:

  • सांस में तकलीफ: विशेष रूप से जब लेटने या शारीरिक गतिविधि के दौरान।
  • थकान: कमजोरी या थकान का सामान्य अनुभव।
  • पैरों, टखनों और पैरों में सूजन: यह तरल संचय के कारण होता है।
  • लगातार खांसी या घरघराहट: अक्सर सफेद या गुलाबी रंग की बलगम के साथ।
  • बढ़ी हुई हृदय गति: दिल अपनी पंपिंग क्षमता की भरपाई करने के लिए तेज़ धड़कता है।
  • जबकि हार्ट अटैक हार्ट फ़ेलियर का कारण बन सकता है, ये दोनों अलग-अलग स्थितियाँ हैं जिनके कारण और प्रभाव भिन्न होते हैं।

हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर: मुख्य अंतर

कारण:

   हार्ट अटैक: कोरोनरी आर्टरी में अवरोध के कारण रक्त प्रवाह रुक जाता है।

हार्ट फ़ेलियर: दिल की मांसपेशियों की कमजोरी या अन्य स्थितियों के कारण दिल की पंपिंग क्षमता घट जाती है।

लक्षण:

हार्ट अटैक: अचानक सीने में दर्द, असहजता, और सांस की तकलीफ।

हार्ट फ़ेलियर: लंबे समय तक रहने वाले लक्षण जैसे सांस की तकलीफ, थकान, और सूजन।

इलाज:

  • हार्ट अटैक: त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, जिसमें दवाइयाँ, एंजियोप्लास्टी या सर्जरी शामिल हो सकती है।
  • हार्ट फ़ेलियर: जीवनशैली में बदलाव, दवाइयाँ, और कुछ मामलों में सर्जरी या उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है।
  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण:
  • हार्ट अटैक: तत्काल चिकित्सा देखभाल से ठीक हो सकता है, लेकिन दिल की मांसपेशी को स्थायी नुकसान हो सकता है।
  • हार्ट फ़ेलियर: यह अक्सर एक पुरानी स्थिति होती है जिसे दीर्घकालिक प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर से बचने के उपाय

दोनों ही स्थितियाँ काफी हद तक जीवनशैली में बदलाव और चिकित्सा हस्तक्षेप के द्वारा रोकी जा सकती हैं। यहाँ कुछ तरीके हैं, जिनसे आप इन स्थितियों के जोखिम को कम कर सकते हैं:

स्वस्थ आहार बनाए रखें:

  • हृदय के लिए उपयुक्त आहार खाएँ: साबुत अनाज, फल, सब्जियाँ, लीन प्रोटीन और स्वस्थ वसा का सेवन करें, जैसे जैतून का तेल, नट्स, और एवोकाडो।
  • नमक का सेवन कम करें: अधिक सोडियम रक्तचाप को बढ़ा सकता है, जो दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है।
  • ट्रांस फैट और संतृप्त वसा से बचें: ये वसा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकते हैं और एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • नियमित व्यायाम करें:

सक्रिय रहें: नियमित शारीरिक गतिविधि दिल को मजबूत करती है और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करती है। प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट का मध्यम व्यायाम करें।

एरोबिक व्यायाम जैसे चलना, दौड़ना, तैराकी, और साइक्लिंग हृदय के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं।

रक्तचाप नियंत्रित करें:

अपने रक्तचाप की निगरानी करें: उच्च रक्तचाप हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर दोनों का प्रमुख कारण है।दवाइयाँ लें अगर जरूरत हो, और डॉक्टर की सलाह का पालन करें ताकि रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सके।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करें:

स्वस्थ कोलेस्ट्रॉल स्तर बनाए रखें खराब वसा से बचने के लिए आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाएँ। उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों के लिए स्टेटिन जैसी दवाइयाँ निर्धारित की जा सकती हैं।

धूम्रपान छोड़ें:

धूम्रपान हृदय रोगों के मुख्य कारणों में से एक है। इसे छोड़ने से रक्त प्रवाह में सुधार होता है और हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।

शराब का सेवन सीमित करें:

अत्यधिक शराब पीने से रक्तचाप बढ़ सकता है, जिससे हार्ट फ़ेलियर और अतालता का खतरा बढ़ता है। शराब का सेवन मध्यम मात्रा में करें।

तनाव को नियंत्रित करें:

मानसिक तनाव रक्तचाप को बढ़ा सकता है और अस्वस्थ आदतों को बढ़ावा दे सकता है। तनाव को कम करने के उपायों जैसे ध्यान, गहरी श्वास, या योग का पालन करें।

नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएँ:

नियमित चेक-अप करवाकर अपने हृदय स्वास्थ्य की निगरानी करें, जिसमें कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप, और शर्करा के स्तर की जांच की जाती है।

डायबिटीज नियंत्रित करें:

अनियंत्रित डायबिटीज हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर का खतरा बढ़ा सकती है। रक्त शर्करा के स्तर को स्वस्थ सीमा में बनाए रखें।

क्या दिल के मरीजों के लिए सेक्स करना सुरक्षित है?

हार्ट मरीजों के लिए एक सामान्य चिंता यह होती है कि क्या उनके लिए सेक्स करना सुरक्षित है। इसका उत्तर मुख्यतः इस बात पर निर्भर करता है कि दिल की बीमारी कितनी गंभीर है और व्यक्ति की समग्र स्थिति कैसी है। अधिकांश दिल के मरीजों के लिए, जब दिल की स्थिति नियंत्रित हो, तो सेक्स सामान्य रूप से सुरक्षित हो सकता है।

सेक्स और हृदय स्वास्थ्य:

  • अपने डॉक्टर से सलाह लें: सेक्स शुरू करने से पहले यह जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से यह सुनिश्चित करें कि यह आपके लिए सुरक्षित है।
  • मध्यम शारीरिक गतिविधि: सेक्स एक मध्यम शारीरिक गतिविधि हो सकता है। यदि डॉक्टर अनुमति देते हैं, तो आप सामान्य गतिविधियों के बिना अत्यधिक थकावट या सीने में दर्द के सेक्स कर सकते हैं।
  • लक्षणों पर ध्यान दें: अगर सेक्स करते समय सीने में दर्द, चक्कर, या सांस की तकलीफ हो तो तुरंत रुकें और चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
  • हार्ट फ़ेलियर या हाल ही में हार्ट अटैक का सामना करने वाले लोगों के लिए सामान्यतः यह सलाह दी जाती है कि वे अपनी रिकवरी पूरी होने तक सेक्स से बचें।

हार्ट अटैक के लक्षणों में पुरुष और महिला में अंतर

हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग हो सकते हैं, और अक्सर यह गलत निदान का कारण बन सकता है, खासकर महिलाओं में। इन अंतर को समझना जल्दी पहचान और त्वरित उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।

पुरुषों में सामान्य लक्षण:

  • तेज सीने में दर्द: पुरुषों में सीने में अचानक तेज दर्द या दबाव का अनुभव होता है।
  • हाथ, जबड़े, या पीठ में दर्द: यह दर्द सीने से अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
  • सांस में तकलीफ: अक्सर सीने के दर्द के साथ।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण: विशेषताएँ और पहचान

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं। यह तथ्य महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार उनके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि उन्हें अन्य समस्याओं के रूप में समझा जाता है। इसलिए, महिलाएँ हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समय रहते इलाज नहीं हो पाता और स्थिति और गंभीर हो सकती है। आइए, महिलाओं में हार्ट अटैक के सामान्य लक्षणों पर विस्तार से चर्चा करें।

1. अजीब थकान (Excessive Fatigue)

महिलाओं में हार्ट अटैक का एक आम लक्षण अत्यधिक थकान है, जिसे वे सामान्य थकावट के रूप में देख सकती हैं। यह थकान बिना किसी शारीरिक परिश्रम के भी महसूस हो सकती है। महिलाएँ इसे कभी-कभी सामान्य कार्यभार, तनाव या किसी अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण मान लेती हैं। हालांकि, हार्ट अटैक के दौरान यह थकान लगातार बनी रहती है और अन्य किसी कारण से नहीं आती। यह लक्षण कभी-कभी इतनी तीव्र हो सकती है कि महिला को दैनिक गतिविधियाँ करने में भी कठिनाई होने लगती है। थकान के साथ शरीर में कमजोरी का एहसास भी हो सकता है, जो हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

2. उल्टी या मितली (Nausea or Vomiting)

महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान उल्टी या मिचली का अनुभव भी हो सकता है। यह लक्षण खासकर उन महिलाओं में अधिक पाया जाता है जिनमें सीने में दर्द नहीं होता। कई महिलाएँ उल्टी या मिचली को अपच या गैस्ट्रिक समस्या के रूप में गलत समझ सकती हैं, लेकिन यह हार्ट अटैक का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। इसके कारण कई बार महिलाएँ सही समय पर चिकित्सा सहायता नहीं प्राप्त करतीं, और स्थिति को गंभीर बना देती हैं। अगर महिलाओं को बिना किसी स्पष्ट कारण के मिचली या उल्टी का अनुभव होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

3. पीठ, गर्दन, या जबड़े में दर्द (Pain in the Back, Neck, or Jaw)

सीने में दर्द हार्ट अटैक का एक प्रमुख लक्षण होता है, लेकिन महिलाओं में यह दर्द आमतौर पर सीने के अलावा अन्य हिस्सों में महसूस हो सकता है, जैसे पीठ, गर्दन, या जबड़ा। यह दर्द हल्का या तीव्र हो सकता है और कभी-कभी ऐसा महसूस हो सकता है कि गर्दन में खिंचाव या दबाव हो रहा है। इस दर्द को महिलाओं द्वारा आमतौर पर मांसपेशियों के खिंचाव या किसी अन्य कारण से जोड़ा जाता है, लेकिन यदि यह दर्द लगातार या बढ़ता हुआ हो, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। खासकर जब दर्द अन्य लक्षणों जैसे थकान या सांस की तकलीफ के साथ हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

4. चक्कर या हलका महसूस होना (Dizziness or Lightheadedness)

चक्कर आना या हलका महसूस होना महिलाओं में हार्ट अटैक का एक अन्य सामान्य लक्षण है। यह लक्षण विशेष रूप से तब होता है जब रक्त प्रवाह दिल से शरीर के अन्य हिस्सों में पर्याप्त रूप से नहीं पहुँच पाता। हार्ट अटैक के दौरान, दिल की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है, जिससे शरीर के अन्य हिस्सों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। इससे महिलाओं को चक्कर आ सकते हैं या वे हलका महसूस कर सकती हैं। यह लक्षण उन महिलाओं में अधिक आम है जो पहले से किसी हृदय रोग से पीड़ित हैं या जिनका रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल अधिक है।

5. असामान्य घबराहट या मानसिक तनाव (Unusual Anxiety or Mental Stress)

महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान मानसिक तनाव या घबराहट का अनुभव भी हो सकता है। यह लक्षण महिलाओं को शारीरिक लक्षणों से पहले या साथ में महसूस हो सकता है। उन्हें ऐसा महसूस हो सकता है कि कुछ गलत हो रहा है, या वे किसी गंभीर समस्या का सामना कर रही हैं। इस घबराहट को वे अक्सर चिंता या तनाव के रूप में मान सकती हैं, लेकिन अगर यह घबराहट अचानक आती है और साथ में अन्य हार्ट अटैक के लक्षण होते हैं, तो यह हार्ट अटैक का एक प्रमुख संकेत हो सकता है।

6. सीने में हल्का दबाव या दर्द (Mild Chest Discomfort or Pressure)

महिलाओं में हार्ट अटैक का लक्षण हमेशा तेज दर्द के रूप में नहीं होता। कई बार उन्हें सीने में हलका दबाव या असहजता का अनुभव हो सकता है, जिसे वे सामान्य रूप से नज़रअंदाज कर देती हैं। यह दबाव कभी कभी तीव्र हो सकता है, और यह अचानक उत्पन्न होता है। सीने में दर्द या दबाव को महिलाओं द्वारा ऐंठन, गैस, या पेट में दर्द के रूप में समझा जा सकता है। अगर यह लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसे नज़रअंदाज न करें और चिकित्सीय सलाह लें।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान और जागरूकता

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से भिन्न हो सकते हैं, और ये लक्षण कभी-कभी इतनी सामान्य होते हैं कि इन्हें अन्य स्थितियों के रूप में समझा जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप, महिलाएँ अक्सर हार्ट अटैक को गंभीरता से नहीं लेतीं, जिससे निदान और उपचार में देरी हो सकती है। यही कारण है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार प्राप्त करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

अगर महिलाओं को इन लक्षणों का अनुभव होता है, तो उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। हार्ट अटैक के इलाज में समय का बहुत महत्व है, और जितना जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना ही बेहतर परिणाम मिल सकता है। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए और नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए ताकि वे दिल की बीमारियों से बच सकें और समय रहते उपचार प्राप्त कर सकें।

निष्कर्ष

हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर दो अलग-अलग, लेकिन संबंधित स्थितियाँ हैं, जिनका गंभीर परिणाम हो सकता है यदि इलाज न किया जाए। इन स्थितियों के बीच अंतर को समझना और इनसे बचने के उपाय जानना दिल के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, जोखिम कारकों का प्रबंधन करके, और समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करके हम हृदय रोगों के जोखिम को कम कर सकते हैं और अपने जीवन की गुणवत्ता को सुधार सकते हैं।दिल के मरीजों के लिए, चिकित्सक से नियमित रूप से सलाह लेना महत्वपूर्ण है, खासकर सेक्स जैसे शारीरिक गतिविधियाँ करने से पहले। पुरुष और महिला में हार्ट अटैक के लक्षणों में अंतर को समझना भी जल्दी पहचान और त्वरित उपचार के लिए जरूरी है।

हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक, सक्रिय और सतर्क रहकर, आप हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर के जोखिम को कम कर सकते हैं और एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

Spread the love