पित्त की थैली निकालने की सर्जरी – pit ki thaili ka operation

जब भी हम पित्त की थैली में बने स्टोन के बारे में बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में यही सवाल उठता है कि यह स्टोन हमारे गॉलब्लैडर में कैसे बन गया! मैं तो सही खान-पान के साथ-साथ वर्कआउट भी करता हूं, फिर अचानक से मेरे पित्त की थैली में स्टोन कैसे बन गए! जब हम इस स्टोन के बारे में लोगों को बताते हैं तो लोग तरह-तरह के घरेलू नुक्से और आयुर्वेदिक उपाय बताते हैं! सबसे पहले यह समझ ले कि पित्त की थैली के जो स्टोन होते हैं वह किडनी के स्टोन से अलग होते हैं, कई लोगों को ऐसा लगता है कि दोनों स्टोन एक जैसे ही होंगे और इसका इलाज एक जैसा ही होगा पर ऐसा नहीं है, आज हम pit ki thaili ka operation कैसे होता है इस विषय के बारे में बात करने वाले है !

pit ki thaili ka operation
pit ki thaili ka operation

गॉलब्लैडर क्या होता है

गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) हमारे लीवर के दाहिने भाग का एक छोटा सा ऑर्गन है जो कि Upper Abdomen में लीवर के नीचे छोटी सी थैली की तरह होता है इस थैली की अगर कैपेसिटी की बात की जाए तो यह लगभग 30 से 50 ml की होती है! हमारा लीवर एक हरे रंग का पित्त बनाता है, जिसे बाइल बोला जाता है यह पित्त नली के रास्ते छोटी आंत में उतर जाती है इस नली के साथ गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) का भी जुड़ाव होता है इस जुड़ाव को डक्ट कहा जाता है और यह डक्ट छोटी आंत में जुड़ी होती है छोटी आंत से जो नली जुड़ती है उसी नली में पैंक्रियाज की नली जुड़ी होती है हम जो कुछ भी खाते हैं यह पैंक्रियाज ही उसे पचाने का कार्य करता है आप आसान भाषा में समझो तो लीवर और गॉलब्लेडर (पित्त की थैली ) एक नली से जाकर जुड़ते हैं और वह नली पैंक्रियाज की नली से जुड़ती है ये तीनो नली आपस में जुड़कर छोटी आंत में जाकर मिल जाती है!

गॉलब्लैडर कैसे काम करता है !

जब हमारा लीवर पित्त बनाता है तो वो पित्त गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) में जाकर स्टोर हो जाता है, और जितने टाइम तक ये पित्त गॉलब्लेडर(पित्त की थैली) में स्टोर रहता है उतनी टाइम तक गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) उसे कॉन्सेंट्रेटस करता है वैसे तो गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) की जो कैपेसिटी होती है वह 30 से 40 ml की ही होती है, उसके बाद भी लीवर से आ रहे लगातार पित्त को ये गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) कॉन्सेंट्रेटस करता रहता है इस प्रक्रिया के दौरान पित्त में जो साल्ट होते है वो कोलेस्ट्रॉल से मिलकर जमने लगता है लेकिन जब हम खाना खाते हैं तो गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) पम्प करने लगता है, ये पम्प होने का फंक्शन हमारे द्वारा खाया हुआ खाना जब छोटी आंत के पास पहुँचता है तो एक हॉर्मोंस पैदा होता है जो गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) को पम्प करने के फक्शन को एक्टिव करता है पम्प होने की इस प्रक्रिया में कॉन्सेंट्रेटस हो रहा पित्त डग में आकर गिर जाता है!

स्टोन कैसे बनता है

जब हम खाना खाते हैं तो गॉलब्लैडर पम्प करने लगता है ये पम्प होने का फंक्शन हमारे द्वारा खाया हुआ खाना जब छोटी आंत के पास पहुँचता है तो एक हॉर्मोंस पैदा होता है, ज्यादा चिकना और अधिक मात्रा में खाने पर ये हॉर्मोंस बनना बंद हो जाता है हॉर्मोंस रिलीज ना होने पर गॉलब्लैडर पम्प करना बंद कर देता है, परंतु उसके पित्त कॉन्सेंट्रेटस करने का काम चालू रहता है जब गॉलब्लैडर पम्प नहीं होता तो छोटे-छोटे साल्ट जो शुरू में रेत के आकार के होते हैं वह कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर एक बड़ा स्टोन का रूप ले लेते हैं, इसके अलावा और भी कई कारण होते हैं जैसे ब्लड और अन्य कारणों से स्टोन बन सकते हैं!

गॉलब्लैडर में पथरी होने के क्या- क्या लक्षण है

  • गॉलब्लैडर पथरी का दर्द  Upper Abdomen से लेकर पीठ तक जाता है !
  • गॉलब्लैडर में दर्द में स्टोन होने से एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस की स्थिति भी हो सकती है जिससे गॉलब्लैडर में सूजन आ जाती है!
  • गॉलब्लैडर स्टोन की वजह से Upper Abdomen से उठकर पीठ तक जाता है साथ में अपच और उल्टी की शिकायत भी बनी रहती है दर्द के साथ-साथ पेशेंट को सूजन भी महसूस हो सकता है और तेज बुखार भी आ सकता है !
  • स्टोन अगर  सामान्य पित्त नलिका में अटक गया तो पेशेंट को पीलिया की शिकायत भी हो सकती है!

गॉलब्लैडर स्टोन का क्या इलाज है

अगर पेशेंट को बताए हुए लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत एक जनरल सर्जन को दिखाएं https://www.apollo247.com/doctors गॉलब्लैडर स्टोन का पता डॉक्टर अल्ट्रासाउंड MRI . एंडोस्कोपी अल्ट्रासाउंड के द्वारा सुनिश्चित करते हैं, कि यह दर्द किस चीज का है, पेशेंट का लीवर सही ढंग से काम कर रहा है कि नहीं ! आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं, अल्ट्रासाउंड में साफ तौर पर मालूम हो जाता है कि गॉलब्लैडर में स्टोन है कि नहीं अगर है तो इसका क्या इलाज होगा डॉक्टर हमें सारी बातें बताते हैं! कुछ केस में पाया गया कि डॉक्टर पेशेंट की दवाई और कुछ खानपान के परहेज के साथ कुछ समय के लिए उनका इलाज करते हैं परंतु यह सफल इलाज नहीं है! इस बीमारी का प्रभावशाली एक सफल इलाज एक ही है, और वह है पेशेंट के पित्त की थैली को ऑपरेशन करके बाहर निकाल दिया जाए !

 

ऑपरेशन से पहले की तैयारी

  • ऑपरेशन से पहले आप सुनिचित कर ले की आपको सर्जरी के लिए किस दिन और किस टाइम पे हॉस्पिटल आना है!
  • ये सर्जरी सामान्य एनिस्थिसिया देकर की जाती है, जिसमे सर्जरी के बाद एक व्यक्ति आपके साथ रहना जरुरी है!
  • अगर पेशेंट की कोई पुरानी सर्जिकल हिस्ट्री है, तो डॉक्टर को इसके बारे में पहले ही बता दे!
  • पेशेंट अगर पहले से चिकित्सीय स्थिति में सुधार के लिए को ई मेडिसिन ले रहे है, तो उसके बारे में भी डॉक्टर को सूचित करे!
  • ऑपरेशन से पहले डॉक्टर आपसे ब्लड टेस्ट , ईसीजी, चेस्ट एक्स-रे और अगर कार्डिक हिस्ट्री है तो 2 डी इको जैसे टेस्ट करने की सालाह दे सकते है!
  • जिस दिन भी पेशेंट को एडमिट होने के लिए बोला गया है एडमिशन से 8 घंटे पहले से पेशेंट को खाली पेट रहने के लिए बोला जायेगा!
  • सबसे जरुरी है, की एडमिशन से पहले आप अपनी सर्जरी पैकेज की पूरी कॉस्ट पहले ही अच्छे से समझ ले ताकि एडमिशन से पहले आप उतने रुपयों का इंतजाम कर सके!

गॉलब्लैडर की सर्जरी कैसे की जाती है

pit ki thaili ka operation करने के लिए गॉलब्लैडर को शरीर से निकालने के लिए डॉक्टर लैप्रोस्कोपी सर्जरी या कुछ मामलों में ओपन सर्जरी भी करते है वैसे देखा जाये तो ज्यादा तर केस में डॉक्टर लैप्रोस्कोपी सर्जरी ही कराने की सलाह देते है क्योकि लैप्रोस्कोपी सर्जरी आसान होती है, और इस सर्जरी में पेशेंट की रिकवरी जल्दी होती है, इस सर्जरी में पेशेंट के पेट में तीन छेद बनाये जाते है! एक कैमरा जो की तीव्र प्रकाश से जुड़ी हुयी होती है, जिसे अंदर डालने के लिए नाभि के पास एक छेद किया जाता है! इसके अलावा पहला छेद पेट में ऊपर की तरफ करते है और दो चीरे पेशेंट की दायी ओर पसलियों के नीचे सर्जरी उपकरण डालने के लिए किये जाते है! उपकरण पेट में आसानी से जा सके और सर्जरी को आसान बनाने के लिए पेट में कार्बन डाइ-ऑक्साइड भरी जाती है उसके बाद सर्जरी उपकरण की मदद से गॉलब्लेडर को काट कर अलग कर दिया जाता है इस कटे हुए गॉलब्लेडर को नाभि के पास किये हुए चीरे से बाहर निकल लेते है! वैसे तो लगभग सभी केस में गॉलब्लैडर को आसानी से बाहर निकाल लिया जाता है, परन्तु कुछ केस में ये दूरबीन के द्वारा बाहर नहीं निकाल पाया जाता है ऐसी स्थिति में डॉक्टर लैपरोटोमी तकनीक का रास्ता अपनांते है इस तकनीक में ऊपरी पेट के दाहिने तरफ एक 15 से 16 सेमी का चीरा लगा कर इस सर्जरी को की जाती है ऐसा होने पर पेशेंट को 3 से 4 दिन हॉस्पिटल में रुकना पड़ता है लैप्रोस्कोपी से लैपरोटोमी तकनीक द्वारा इस सर्जरी को करने का निर्णय ज्यादा तर केस में सर्जरी करते वक़्त ही डॉक्टर को लेना पड़ता है इस तरह का निर्णय पेशेंट हित के लिए लिया जाता है!

ऑपरेशन के बाद

pit ki thaili ka operation होने के पेशेंट को थोड़ी देर बाद होश आ जाता है , उसके बाद पेशेंट को रिकवरी रूम में लगभग 30 से 45 मिनट तक रख कर पेशेंट को उसके द्वारा बुक किये हुए वार्ड या रूम के बेड पर ले जाया जाता है , जहाँ पर हॉस्पिटल स्टाफ और डॉक्टर की निगरानी में पेशेंट की देखभाल की जाती है, दर्द से राहत और पेशेंट की रिकवरी जल्दी हो इसके लिए डॉक्टर द्वारा कुछ मेडिसिन चलायी जाती है कई बार डॉक्टर उसी दिन शाम तक पेशेंट को डिस्चार्ज कर सकते है नहीं तो दूसरे दिन पेशेंट को डिस्चार्ज कर दिया जाता है

ऑपरेशन के बाद ध्यान देने वाली बाते

  • pit ki thaili ka operation ऑपरेशन के बाद कुछ दिन दर्द बना रहेगा जो की दर्द से राहत देने वाली दवाई लेने पर राहत मिल जाएग!
  • ऑपरेशन के बाद जब पेशेंट डिस्चार्ज होता है तो उसे लगभग 10 से 15 दिन की दवाई दी जाती है, जिसे ध्यान पूर्वक लेनी चाहिए , ये वो दवाई होती है जो सर्जरी होने के कारण और आपके पेट में भरी हई गैस से जो दर्द हो रहा होता है उसमे जल्दी राहत देता है!
  • ऑपरेशन के बाद डॉक्टर चलने फिरने की सलाह देते है परन्तु ध्यान देने वाली बात यह है की जब पेशेंट बेड से उठे या करवट बदले तो किसी का सहारा लेकर उठे !
  • ऑपरेशन होने के कारण पेट में जो दर्द है वो 3 से 5 दिन में खत्म हो जाएगी जिसके लिए पेशेंट को दी हुयी डिस्चार्ज मेडिसन नियमित रूप से लेनी होगी !
  • ऑपरेशन के बाद लगभग 1 महीने तक भारी वजन उठाना तथा कठिन व्यायाम नहीं करना चाहिए!
  • ऑपरेशन के शुरुआती दिनों में हल्का भोजन करना चाहिए ,3 से 5 दिन बाद पेशेंट की आंत सामान्य रूप से कार्य करने लग जाती है उसके उपरान्त आप अपनी भोजन को डॉक्टर की सलाह अनुसार बढ़ा सकते है!
  • इस सर्जरी के बाद डॉक्टर पेशेंट को तला , भुना और ज्यादा तेल वाला खाना खाने के लिए मना करते है!

FAQ

Question : पित्त की थैली निकालने से क्या नुकसान होता है?
पित्त की थैली शरीर से बाहर निकालने के बाद डॉक्टर हमें तला – भूना हुआ खाना खाने के लिए मना करते है क्योंकि पित्त की थैली ना होने पर खाना पचने में परेशानी होती है, जिसके कारण बुखार के साथ -साथ दर्द भी बना रहता है ! सर्जरी होने के बाद खाना पचाने की झमता कम हो जाती है जिसके कारण पेट में कब्ज बना रहता है, जिससे हर्निया होने की संभावना भी बनी रहती है !
Question : पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?
पित्त की थैली की सर्जरी होने के बाद डॉक्टर पेशेंट को आराम से पच जाने वाले भोजन का सेवन करने की सलाह देते है, इसके साथ में कम से कम पांच से छह सप्ताह घरेलू काम काज ना करने की सलाह दी जाती है !
Question : क्या पित्ताशय की थैली का ऑपरेशन दर्दनाक है?
ऑपरेशन के बाद पेशेंट को 10 से 15 दिन की दवाई दी जाती है, जो सर्जरी होने के कारण पेशेंट के पेट में भरी हई गैस से जो दर्द हो रहा होता है उसमे जल्दी राहत देता है! ऑपरेशन के बाद चीरे वाली जगह के साथ -साथ दो से तीन दिन कंधे में दर्द बना रह सकता है, जिसका मुख्य कारण ऑपरेशन के दौरान पेट में भरी हुई गैस होती है, जिसका दर्द धीमे -धीमे दो से तीन दिन में कम होने लगता है !

 

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